M.P. Pench park : चेन्नई के कुणाल एल गोयल ने वन्यजीवों की अठखेलिया और प्राकृतिक सौदर्य को करीब से जाना , सोशल मीडिया में साझा की जानकारी
सिवनी, 20 सितम्बर। विश्वविख्यात पेंच नेशनल पार्क के वन्यप्राणियों , प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्धि एवं कुशल प्रबंधन को करीब से देखकर जाने वाले वाईल्ड लाइफ फोटोग्राफर, वन्य एवं प्रकृति प्रेमी चेन्नई निवासी कुणाल एल गोयल ने सोशल मीडिया फेसबुक के पेज CLaW-Conservation Lenses & Wildlife पर बताया कि यह भारत का सबसे अच्छा टाइगर रिजर्व है और सभी टाइगर प्रेमियों को रुखड आने की सिफारिश की है।



कुणाल एल गोयल ने फेसबुक पेज पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि मुझे नागपुर निवासी एक दोस्त ने कहा कि पेंच टाईगर रिजर्व भारत का सबसे अच्छा टाइगर रिजर्व है।


जिस पर उन्होनें 4 सफारी ऑनलाइन बुक की जो उन्हें आसानी से मिल गई और वह 17 सितम्बर से 19 सितम्बर तक रूखड बफर में रहे इस दौरान उन्होनें पेंच टाईगर रिजर्व के कुरईगढ नर बाघ और कोर की लंगड़ी बाघिन की वंशज को करीब से देखा और उसके आकर्षक फोटोग्राफ लिये। उन्होनें सड़क पर दो बाघ (नर और मादा) और एक नर तेंदुए को देखा। रूखड बफर क्षेत्र कुरईगढ नर बाघ, किंगफिशर नर बाघ के लिए प्रसिद्ध है। पेंच के सभी ड्राइवर बेहद ज्ञानी और जागरूक हैं । वे उचित दूरी बनाए रखते हैं और कोशिश करते हैं कि सभी पर्यटकों को आकर्षक बाघ व वन्यप्राणियों की तस्वीरें मिल जाए ।


उन्होनें बताया कि सन 1920 में (M.S.L.-1990 F.T. ) निर्माण हुए रूखड गेस्ट हाउस में उन्हें रूकने का सौभाग्य मिला। तीनों दिनों में उन्होनें प्रकृति को बहुत करीब से देखा और वन्यजीवियों की अठखेलियों को देखकर वह बहुत ही प्रसन्नचित हुए इस दौरान उन्होनें दो घंटे में छह बार बाघ-बाघिन की अठखेलियां बहुत करीब से देखा है। वहीं नन्हें बंदर अपने मां के सिर पर बालों को साफ व उनकी मां एक नन्हे शावक को दूध पिलाते नजर आई। इस दौरान उन्होनें देखा कि नन्हें बंदर का अपने मां के साथ लाड कर रहे और उनकी मां उनके साथ दुलार कर रही है यह सब देखकर उन्होनें मॉ और बच्चों का अगाढ प्रेम को महसूस किया। जिसे फोटोग्राफी में उतारने में वह विफल है।


वहीं नन्हें बंदर एक पत्थर पर बैठकर एक हाथों में एक पेड के डाली व पत्तों को लेकर पास में ही ध्यान क्रेन्द्रित कर भोजन की तलाश कर रहे। वन्यजीवों के प्राकृतिक सौंदर्य को पाकर उनकी खुशी का ठिकाना नही था। बाघ की दहाड, तेंदुए का पेड की डाली में आराम से सोना , अकेले लेकिन शक्तिशाली तेंदुए और 100 वर्षो से अधिक पुराने विश्राम गृह व उनके कमरे पलास व अर्जुन व आसपास की रंगरोनक ने तो उनके मन को प्रफुल्लित कर दिया जैसे वह बिल्कुल प्रकृति के करीब है। पेंच में उन्होनें बंदर, तेंदुए , गौर , प्राकृतिक सौंदर्य के आकर्षक छायाचित्र लिये है। जो अविस्मरणीय है।


कुणाल ने बताया कि रूखड बफर में एसडीओ आशीष पांडे द्वारा अनुशासन का विशेष ध्यान दिया जाता है उनके द्वारा वाहन चालकों , गाइडों को समय-समय पर मार्गदर्शन दिया जाता है। टिकिट बुकिंग भी सुचारू थी, ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध हैं। एसडीओ आशीष पांडे व्यक्तिगत रूप से पार्क में सुविधाओं और वन संरक्षण गतिविधियों को सुनिश्चित करते है।
हिन्दुस्थान संवाद
