Seoni: महिला शौचालय की कमी से हो रही महिलाओं को परेशानी- राजेश्वरी सिंह पैरालीगल वालंटियर
सिवनी, 02 जनवरी । जिला मुख्यालय में महिला शौचालय की कमी है।राजेश्वरी सिंह पैरालीगल वालंटियर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जिला न्यायालय का कहना है कि महिला शौचालय की कमी से महिलाओं को विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। घर-घर शौचालय तथा सार्वजनिक शौचालय भी हो और इसका इस्तेमाल हो इसके लिए सरकार लगातार प्रयास भी कर रही हैं। ये देश के विकास में तो महत्वपूर्ण है ही साथ ही सेहत से भी इसका पूरा सरोकार है। हाल ही में जारी हुई फिल्म पेडमेन एवम टॉयलेट एक प्रेमकथा के प्रोमो में भी महिलाओं को गंदा कपड़ा उपयोग करने एवम महिलाओं को खुले में शौच जाने पर क्या क्या समस्याएं आती हैं ये दिखाया गया है। राजेश्वरी सिंह का कहना है कि समय पर पैड का ना मिलना, शौचालय का न होना और गंदा होना दोनों ही कई बीमारियों को न्यौता देता है। ग्रामीण क्षेत्रों व शहरों में काम करने वाली महिलाएं जिन्हें ये सुविधा नहीं मिलती वे उसके अभाव और साफ-सफाई की खराब व्यवस्था के कारण यूटीआई से पीड़ित होती हैं। शहरी और खासकर कामकाजी महिलाएं शौचालयों की कमी के कारण इस समस्या से ग्रस्त हो रही हैं। यूटीआई यानि यूरीनरी ट्रेक्ट इंफेक्शन होने के कई कारण हैं जिनमें शौच के बाद सही तरीके से सफाई न करने, पेशाब लगने के बावजूद बहुत देर तक शौचालय न जाना भी है। इस बारे में चिकित्सकों और विशेषज्ञों के आकलन के बाद यह भी कहा गया है कि यूटीआई महिलाओं और पुरुषों में देखा गया है, लेकिन पुरुषों की तुलना में महिलाएं इसकी ज्यादा शिकार हैं। यूटीआई को महिलाओं में सबसे आम बैक्टीरियल इंफेक्शन माना जाता है। लगभग 50 से 60 प्रतिशत महिलाएं अपने जीवन में कम-से-कम एक बार यूटीआई से पीड़ित पाई गई हैं। हर वर्ष विश्व के लगभग 15 करोड़ लोगों में यूटीआई के मामले पाए जाते है। जिला मुख्यालय शिवनी में कामकाजी 32 वर्षीय सिया भलावी का कहना है कि शहर में कई जगह महिला शौचालय तो बने नहीं हैं दिन में बड़ी दिक्कत हो जाती है, पानी ज्यादा नहीं पीते कि बार-बार बाथरूम न जाना पड़े। वहीं शहर की एक प्राइवेट कंपनी में काम करने वाली 24 वर्षीय वंदना बताती हैं, कि मेरे काम ज्यादातर फील्डवर्क का है ऐसे में जब मैं बाहर होती हूं तो अलग से महिला शौचालय दिखते नहीं हैं सार्वजनिक शौचालय इतने गंदे हैं कि उन्हें इस्तेमाल करने से पहले सोचना पड़ता है। स्वच्छ सार्वजनिक शौचालयों का अभाव और कार्यस्थलों पर भी ऐसे टॉयलेट का अभाव एक बड़ी समस्या है। इससे होने वाली बीमारियों के बारे में स्त्री रोग विशेषज्ञ बताती हैं, ऐसी बीमारियों में व्यक्तिगत साफ-सफाई तथा जागरुकता बहुत जरूरी मानी जाती है। यूटीआई बहुत आम समस्या होती जा रही है। अक्सर ऐसे केस आते हैं जो महिलाएं ऑफिस में काम करती हैं या बाहर ट्रैवल करती हैं उन्हें यूरिन लगने पर या महावारी होने पर पेड ना बदलने के कारण तुंरत टायलेट का न मिलना बीमारी की तरफ भेजता है। यूरिन लगने पर रोकना पथरी का भी कारण बन सकता है। वहीं दूसरी तरफ गंदे शौचालय कई तरह के इंफेक्शन को बढ़ावा देते हैं।
सफर के दौरान शौचालय की सुविधा न होना भी समस्या
अगर कभी बस से सफर कर रहें हों तो शहर के मुख्य मार्ग में टॉयलेट की सुविधा नहीं है। देर रात में प्राइवेट बस स्टैंड अंदर होने के कारण वहां जा नहीं पाते। हाईवे वगैरह पर वैसे भी महिलाएं कहां गाड़ी रोक कर कहेंगी टॉयलेट जाने को। इसके साथ ही बस स्टैंड के टॉयलेट इतने गंदे होते हैं कि उनसे बचने की कोशिश करतें हैं। यूटीआई के लक्षण होने पर बार-बार पेशाब लगना, पेशाब करने के दौरान जलन, बुखार, बदबूदार पेशाब होना और पेशाब का रंग धुंधला या फिर हल्का लाल होना और पेट के निचले हिस्से में दबाव महसूस होना इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं। यूटीआई के साथ मुख्य समस्या यह होती है कि एक बार ठीक होने के बाद इस संक्रमण के दोबारा होने की आशंका काफी ज्यादा होती है। ज्यादातर 50 प्रतिशत महिलाओं को एक साल के भीतर दोबारा यह संक्रमण हो जाता है। इसलिए यूटीआई होने पर एंटीबायोटिक का कोर्स पूरा करना जरूरी होता है। साथ ही दवा बंद करने के एक सप्ताह बाद फिर से यूरिन टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है, ताकि दोबारा संक्रमण होने की आशंका को दूर किया जा सके। महिला चिकित्सक सलाह देती हैं कि जैसे ही पेशाब लगे, तुरंत शौचालय जाएं। पेशाब को रोक कर न रखें।पेशाब करने के बाद अपने प्राइवेट पार्ट्स की सही तरीके से सफाई जरूर करें।सार्वजनिक शौचालयों के इस्तेमाल के समय सतर्कता बरतें। 80 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में संक्रमण यहीं से होता है। अधिकतर महिलाओं का कहना है कि नगरपालिका को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है कि सार्वजनिक स्थानों जैसे बुधवारी,थाने के पास,नेहरूरोड,शुक्रवरी मंगलीपेठ, छिंदवाड़ा चौक,बाहुबली चौक बारापत्थर, भैरोगंज,डूंडा सिवनी आदि स्थानों में महिला शौचालय अवश्य होना चाहिए।
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