सिवनीः पदोन्नति में आरक्षण पर ठोस निर्णय ले राज्य सरकार- सपाक्स

सिवनी,30 जनवरी। विगत दिवस सर्वाेच्च न्यायालय के तीन जजों की पीठ द्वारा पदोन्नति में आरक्षण को लेकर दिए गए फैसले पर सामान्य,पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था सपाक्स के जिला नोडल अधिकारी एवं जिला अध्यक्ष प्रद्युम्न चतुर्वेदी ने रविवार को बताया कि न्यायालय द्वारा यह स्पष्ट कर दिया गया है कि पदोन्नति में आरक्षण हेतु एम.नागराज प्रकरण और जरनैल सिंह प्रकरण में निश्चित किए गए मार्गदर्शी सिद्धांतो का पालन अनिवार्य होगा। यह उल्लेखनीय है कि पदोन्नति में आरक्षण बंधनकारी अधिकार नहीं हैं बल्कि राज्य विशेष यदि चाहे तो पदोन्नति में आरक्षण के लिए कुछ बंधनकारी शर्तों का पालन करना आवश्यक है। एक बार फिर मा. न्यायालय के निर्णय ने इसे ही पुष्ट किया है।
उल्लेखनीय है कि मप्र पदोन्नति नियमों को 30 अप्रैल 2016 को माननीय उच्च न्यायालय ने एम. नागराज प्रकरण में निर्धारित मार्गदर्शी सिद्धांतो के अनुरूप न पाते हुए असंवैधानिक करार देकर हुए खारिज कर दिया था। माननीय सर्वाेच्च न्यायालय ने पुनरू यह स्पष्ट कर दिया है कि एम. नागराज और जरनैल सिंह प्रकरण में निर्धारित मापदंडो का पालन करते हुए ही किसी प्रकार के नियम बनाए जा सकते हैं।
अब यह स्पष्ट है कि म.प्र सरकार द्वारा वर्ग विशेष के लिए अनावश्यक रूप से प्रदेश में पदोन्नति की प्रक्रिया रोक कर रखी है, जबकि अनारक्षित श्रेणी में पदोन्नति हेतु किसी प्रकार की कोई रोक न तो उच्च न्यायालय ने लगाई थी न ही सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा पदोन्नतियां रोकी गई थीं। सपाक्स संस्था प्रांतीय पदाधिकारियों के नेतृत्व में लगातार इस तथ्य से स्वयं मुख्यमंत्री एवं अन्य संबंधितों को अवगत कराती रही तथा सपाक्स वर्ग की पदोन्नतियां करने की गुहार लगाती रही है। मप्र सरकार पूरी तरह से 64 प्रतिशत वर्ग के हितों को दरकिनार कर विगत 6 वर्षों से अन्याय कर रही है। नतीजा यह कि सरकार द्वारा हजारों कर्मचारी बिना पदोन्नति व आर्थिक लाभ के सेवानिवृत कर दिए गए जबकि ऐसे कर्मी सरकार द्वारा उच्च पदों पर स्थापित किए गए जिन्हें वास्तव में वहां होना ही नहीं चाहिए जहां वे हैं।
आगे बताया कि निर्णय में पीठ ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि एम. नागराज के वर्ष 2006 के निर्णय के बाद से ऐसे कोई भी नियमों, जो एम. नागराज प्रकरण के सिध्दांतों का परिपालन नहीं करते,के अंतर्गत की गई सभी पदोन्नतियां गलत हैं। अतः ऐसे नियमों से लाभान्वित सभी कर्मी पदावनत होंगे जैसा कि मा. उच्च न्यायालय जबलपुर ने अपने निर्णय में कहा है।
प्रद्युम्न चतुर्वेदी ने कहा कि सपाक्स संस्था एक बार फिर मुख्यमंत्री, पदोन्नति नियमों हेतु गठित मंत्री समूह से अनुरोध करती है कि संविधान प्रदत्त व्यवस्था के अनुरूप ही किसी प्रकार के नए नियम बनाए जाएं तथा जब तक प्रकरण में अंतिम निर्णय नहीं आता, सामान्य, पिछड़ा व अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मियों की पदोन्नतियां तत्काल प्रारंभ करे। संस्था इस संबंध में एक बार फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर उनसे कार्यवाही सुनिश्चित करने की अपील करेगी। संस्था की सभी जिला, तहसील स्तर की इकाइयां अगले सप्ताह जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपेंगी।

हिन्दुस्थान संवाद

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