सिवनी, 04 सितम्बर । कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी डॉ. राहुल हरिदास फटिंग ने शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों के परिपालन में आम जनता की सुविधा, स्वास्थ्य सुरक्षा, शांति एवं कानून व्यवस्था को बनाये रखने हेतु जिले की राजस्व सीमा में प्रभावशील कार्यालयीन आदेश 15 जुलाई एवं 20 जुलाई को यथावत लागू रखते हुए, दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 तहत शनिवार को अतिरिक्त प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं।

जारी आदेशानुसार जिले में प्रतिमा, ताजिये (चेहल्लुम) के लिए पण्डाल का आकार अधिकतम 30X45 फीट नियत किया गया है। झांकी निर्माताओं को आवश्यक रूप से यह सलाह दी गई है कि वे ऐसी झांकियों की स्थापना व प्रदर्शन नहीं करें, जिनमें संकुचित जगह के कारण श्रद्धालुओं, दर्शकों की भीड़ की स्थिति बने तथा सोशल डिस्टेंसिग का पालन ना हो सके। झांकी स्थल पर श्रद्धालुओं, दर्शकों की भीड़ एकत्र न हो तथा सोशल डिस्टेसिंग का पालन हो,इनकी व्यवस्था आयोजकों को सुनिश्चित करनी होगी।

इसी तरह मूर्ति ताजिये (चेहल्लुम) का विसर्जन सम्बंधित आयोजन समिति द्वारा किया जाएगा विसर्जन स्थल पर ले जाने के लिए अधिकतम 10 व्यक्तियों के समूह की अनुमति होगी। इसके लिए आयोजकों को पृथक से सम्बंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी से लिखित अनुमति प्राप्त किया जाना आवश्यक होगा। मूर्ति, ताजिये (चेहल्लुम) का विसर्जन जिला प्रशासन, सम्बंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी द्वारा चिन्हित किए गए स्थानों पर ही किया जा सकेगा। कोविड संक्रमण को दृष्टिगत रखते हुए धार्मिक , सामाजिक आयोजन के लिए चल समारोह प्रतिबंधित रहेंगे।

विसर्जन के लिए सामूहिक समारोह भी अनुमत्य नहीं होगा लाउड स्पीकर बजाने के सम्बंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन किया जाना अनिवार्य होगा। सार्वजनिक स्थानों पर कोविड संक्रमण से बचाव के तारतम्य में झांकियों, पण्डालों, विसर्जन के आयोजनों में श्रद्धालु, दर्शक फेस कवर (मास्क), सोशल डिस्टेसिंग एवं सेनेटाईजर का प्रयोग के साथ ही राज्य शासन,जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी किए गए निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा। यदि कोई व्यक्ति दूकानदार, आयोजन समिति, आयोजन मंडल आदि कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करता नहीं पाया जाता अथवा उपर्युक्त आदेश का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके विरुद्ध भारतीय दण्ड संहिता के प्रावधानों के तहत अभियोजन की कार्यवाही की जायेगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से प्रभावशील हो गया हैं एवं इस आदेश का उल्लंघन धारा 188 भारतीय दण्ड विधान एवं आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आएगा। यह आदेश आगामी 30 सितम्बर तक प्रभावशील रहेगा।

हिन्दुस्थान संवाद