सिवनी, 12 अक्टूबर। जिले के रजवाडा लॉन में मंगलवार की शाम को राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के महाकौशल प्रांत के प्रांत प्रचारक प्रवीण गुप्त द्वारा हमारा सांस्कृतिक चिंतन पुस्तक का विमोचन किया गया है।


इस दौरान प्रवीण गुप्त ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीनतम संस्कृति है। जो संपूर्ण विश्व के कल्याण की बात करती है, समय के साथ अनेक संस्कृतियों ने जन्म लिया और विलुप्त हुई किंतु भारतीय संस्कृति निरंतर प्रवाहमान है। उन्होनें बताया कि संस्कृति का मतलब इस भूमि , संस्कृतिमान बिंदुओं की और जिसका मन श्रृद्धा से झुकता है, उस समाज के चिंतन की बात कही , विश्व में 3 संस्कृति सबसे प्राचीन है , भारतीय , चीन और ईजराईल की जिसमें भारतीय संस्कृति 3000 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है। हमारी संस्कृति में सभी को उपासना पद्धति भले ही अलग हो किंतु अंत में हम सभी विश्व के कल्याण की बात कहते है सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुख भागभवेत।
उल्लेखनीय है कि हमारा सांस्कृतिक चिंतन पुस्तक में राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के निर्वतमान सर कार्यवाह सुरेश( भैया जी) जोशी के व्याख्यानों का संकलन है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि गायत्री परिवार से सुंदर लाल बघेल, एवं डॉ.श्याम कुमरे पूर्व कलेक्टर , पूर्व सचिव म.प्र.शासन , गणमान्य नागरिक , जनप्रतिनिधि, डॉक्टर्स , वकील , राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के संपर्क विभाग के जिला एवं नगर टोली के स्वयं सेवक उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान संवाद