विज्ञान सप्ताह पर हुआ सेमीनार
सिवनी, 01 मार्च। आजादी के पहले हमारे देश में सुई जैसी चीज भी विदेशों से आयात की जाती थी। और लगातार बढ़ती आबादी के चलते खाद्यान्न के लिए भी हम विदेशों पर आश्रित थे। लेकिन विज्ञान और वैज्ञानिकों ने ही लगातार प्रयोग के माध्यम से ऐसे नवाचार किये जिसके कारण भारत आत्मनिर्भर बना। और अब हम विदेशों को अपने यहां से वस्तुऐं निर्यात करने में सक्षम है। हमारे यहां की दशा एवं दिशा बदलने में विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उक्त उद्गार कृषि विज्ञान सिवनी के वैज्ञानिक पीके राणा ने कन्या महाविद्यालय में आयोजित सेमीनार में व्यक्त किये।
उन्होंने आगे कहा कि सेमीनार में कृषि के महत्व एवं प्रकार तथा उससे लाभ के संबंध में अनेक ऐसे प्रश्र है, जो इस बात पर बल देते है कि अगर व्यक्ति दृढ़संकल्पित एवं आत्मविश्वास के साथ कार्य करता है तो उसे सफलता अवश्य मिलती है। भारत में मजदूरों के द्वारा कार्य ना करने पर ट्रैक्टर एवं अनेक मल्टीपरपस यंत्र कम्पप्राईनर का उपयोग किया जाता है। जिसमें गहाई,कटाई,मसाई जैसे सभी कार्य एक ही मशीन से किये जा सकते है।


श्री राणा ने आगे कहा कि पहले खेतों में अथवा वृक्षों में रोग लग जाने पर फसल अथवा वृक्ष नष्ट हो जाते थे। लेकिन वर्तमान में वैज्ञानिकों ने ऐसी-ऐसी खोज की है जिससे रोगों को नष्ट किया जा सकता है। और भरपूर लाभ लिया जा सकता है। इसी तरह उद्योगों के बढऩे से बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए विज्ञान ने अनेक कार्य किये है। जैसे,पेट्रोल, डीजल के विकल्प के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाली बाईक,बस जैसे अनेक प्रयोग हमारे सामने है। इस अवसर पर पशु चिकित्सा विभाग के वैज्ञानिक केपीएस सैनी ने कहा कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है। जैसे-जैसे मनुष्य को आवश्यकता और संसाधनों के महत्व के बारे में पता चला वैसे-वैसे खोजे होती रहीं,और विज्ञान को लोगों ने समझा जाना है, तथा उससे होने वाली लाभ के बारे में खुद लाभान्वित हुये है। और दूसरों को भी लाभान्वित किया है।


कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ.अमिता पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय विज्ञान प्रौद्यिगिकी एवं नवाचार को लेकर उपस्थित वैज्ञानिकों ने जो बातें हमारे समकक्ष रखी है, निश्चित ही यह बातें कृषि के क्षेत्र में हमारा मार्गदर्शन करेंगी। निश्चित ही विज्ञान दिवस मनाने का अभिप्राय सिर्फ औपचारिकता नही,बल्कि इसके महत्व को जन,जन तक पहुंचाना है। कार्यक्रम के आयोजक डॉ.शेषराव नावंगे ने कहा कि विज्ञान सप्ताह में जहां छात्राओं ने रूची लेकर निबंध के माध्यम से अपनी बात रखी, वहीं छात्राओं ने स्लोगन से यह संदेश दिया कि वह भी विज्ञान के महत्व को जानती है। रांगोली के माध्यम से मन में उठने वाले सवालों को रखा। जो लोगों को प्रेरणा देगा। प्राध्यापक रूचिका यदु ने कहा कि विज्ञान का संबंध एक विषय से नही बल्कि संपूर्ण ब्रम्हान्ड से है। क्योंकि यह बात उतनी ही सार्थक है कि कोई भी कार्य विज्ञान के बिना संभव नही है। अनिता कुल्हाड़े ने कहा कि लोगों को चाहिए कि नवाचार के माध्यम से अपनी छुपी हुई प्रतिभा को निखारें। अंत में कार्यक्रम में शामिल सभी का आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर बीएस बघेल प्राध्यापक एवं छात्राओं ने रांगोली की प्रस्तुती दी।  

हिन्दुस्थान संवाद

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