ग्वालियर, 13 सितम्बर । पितरों की आत्म तृप्ति के लिए हर वर्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से पितृ पक्ष का आरंभ होता है। इस बार आगामी पितृपक्ष 20 सितंबर सोमवार को भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से आरंभ हो रहा है। पितृपक्ष का समापन 6 अक्टूबर 2021 बुधवार को अश्वनी मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को होगा। इस वर्ष 26 सितंबर को श्राद्ध की तिथि नहीं होगी। वहीं 6 अक्टूबर, सर्वपितृ अमावस्या पर गज छाया योग भी रहेगा।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस वर्ष ग्रहों की श्रेष्ठ स्थिति में श्राद्ध पक्ष का प्रारंभ होगा। वहीं इस बार 16 दिवसीय श्राद्ध पर्व काल में पांच सर्वार्थ सिद्धि योग, एक अमृत गुरु पुष्य योग तथा गज छाया योग का महासंयोग रहेगा। इसके साथ ही श्राद्ध पक्ष की शुरुआत सर्वार्थ सिद्धि योग में तथा श्राद्ध पक्ष का समापन भी सर्वार्थ सिद्धि योग में ही होगा। इन दुर्लभ श्राद्ध पक्ष काल में पितरों के निमित्त श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्न होकर सुख शांति व समृद्धि के साथ वंश वृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करेंगे। साथ ही महालय श्राद्ध पक्ष में गुरु के तारे का उदित रहना तथा तिथि का खंडित नहीं होना श्रेष्ठ माना जा रहा है। इस बार 16 दिवसीय पर्व काल में गुरु तारा उदित अवस्था में रहेगा।

गज छाया योग में सर्वपितृ अमावस्या: इस वर्ष 06 अक्टूबर में अश्वनी कृष्ण पक्ष बुधवार को शाम 4.35 तक गजछाया योग रहेगा। जो कोई व्यक्ति गजछाया नामक योग में सर्वपितृ अमावस्या पर नदी, तालाब, ताल, कुंड, देवभूमि, पीपल वृक्ष के नीचे श्रद्धावत होकर हाथी की छाया में बैठकर तर्पण, श्राद्ध के साथ पितरों को पिंड दान देते हैं, वह सात पीढ़ी तक पितृों के उद्धारक बनते हैं और इसका 5 गुना फल प्राप्त होता है।

इनपुट-हिन्दुस्थान समाचार