मुनि आदित्य सागर जी महाराज ने श्री नेमिनाथ पंचकल्याणक महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ के अवसर पर विशाल धर्मसभा को किया संबोधित

सिवनी, 18 अप्रैल। माता के गर्भ में आये हुए शंकर का पुण्य उसके गुण और भाग्य सभी वाह वातावरण को भी प्रभावित करती है जिसका सब तरफ प्रतिफल सुख समृद्धि के रूप में दिखाई देता है दिखाई देता है। माता की सेवा में तत्पर 56 कुमारी देवियां सेवा करती है माता को किसी तरह का कष्ट ना हो इसका ध्यान रखती हैं भगवान के जन्म तक परिचर्चा में लगी रहती हैं।


उक्त उद्गार मुनि आदित्य सागर जी महाराज ने स्थानीय मिशन स्कूल में चल रहे श्री नेमिनाथ पंचकल्याणक महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ के अवसर पर विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। प्रथम दिवस कार्यक्रम की शुरुआत शिव आराधना, गुरु आमंत्रण, नाड़ी वैद्य, विधान कंचन ,कुलिकरण घट यात्रा ,शोभा यात्रा छोटे जैन मंदिर प्रांगण से कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुई। ध्वजारोहण का सौभाग्य संजय दास जैन को प्राप्त हुआ। मंडप उद्घाटन दीप प्रज्वलन प्रतिष्ठा चार्य निमंत्रण विधि शुद्धि मुनि श्री के मंगल प्रवचन मंडप सिद्धि देवा गमन विधि अंकुर रोपण जग मंडल विधान शांति हवन प्रतिमा के आकार का शुद्धि विधान गुरु भक्ति सहस्त्र सभा प्रवचन गर्भ कल्याणक का पूर्ण रूप इंद्रोका दरबार सम्यक चर्चा आसन कम पाए मान नगर की रचना गर्भ धरण आदि के कार्यक्रम आयोजित किए गए । कार्यक्रम के संयोजक सुदर्शन बाझल, प्रचार प्रसार प्रभारी विपनेश जैन ने बताया कि इस अवसर पर प्रथम दिवस से ही बाहर से आए हुए लोगों ने उत्साह दिखाया है और प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे साथ ही इस कार्यक्रम में ग्वालियर से आए प्रतिष्ठाचार्य पंडित अजीत कुमार शास्त्री द्वारा विधि विधान से आयोजन को संपन्न कराया जाएगा साथ ही कार्यक्रम में मुनि श्री अप्रमेय सागर सहज सागर सहित अनेक विद्वानों का भी समागम होगा जिसका नगरवासी सहित महाकौशल क्षेत्र के लोग धर्म लाभ लेंगे।
हिन्दुस्थान संवाद

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