सिवनी, 29 नवंबर। जिले के वन विभाग में बीते तीन माहों से अधिक लंबे समय से वन विभाग के द्वारा विभिन्न योजनाओं द्वारा संचालित कार्य, निर्माण कार्य, वृक्षारोपण, एस.सी.आई.कूप नं6 द्वारा किये जा रहे कार्य, वृक्षारोपण व अन्य कार्यो से संबंधित श्रमिकों के भुगतान बंद फाइलों में धूल खा रही है जिससे दिन रात मेहनत करने वाले जमीनी सतह के श्रामिक जो जिले के वन विभाग को प्रदेश में विशेष स्थान दिलाकर त्यौहारों में भी परिश्रमिक के लिए मोहताज है। वहीं सूत्रों की माने तों प्रदेश में जिले की प्रोगोसिव 20 से 22 प्रतिशत है। जिसके लिए 181 में शिकायत, परिक्षेत्र कार्यालय के चक्कर काटकर वहां से मिली सांत्वना से हारे थके इस आस से घर से वापस आ जाते है कि आज नही कल उनको उनके द्वारा किये गये परिश्रम का परिश्रमिक मिल जायेगा लेकिन वरिष्ठों के कारण रिजल्ट शून्य का शून्य है।


विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले के वन विभाग के वनमंडलो के अंतर्गत आने वाले परिक्षेत्रों में लंबे समय से श्रमिकों का भुगतान नही हो पाया है जिसकी शिकायत श्रमिकों द्वारा 181, संबंधित परिक्षेत्र कार्यालय में की है। लेकिन इन शिकायतों पर परिक्षेत्र के मुखिया की सांत्वना मिलने के बाद श्रमिकों का भुगतान वरिष्ठ कार्यालय से द्वारा नही किया जा रहा है। लंबे समय से रूके हुये भुगतान को लेकर श्रमिक भी वरिष्ठ अधिकारियों के पास इसलिए नही जा रहे है कि क्योंकि वरिष्ठों द्वारा अपनी अधीनस्थ अमले को साफ निर्देश दिये गये है कि इससे संबंधित कोई भी शिकायत उनके पास आई तो उन पर कार्यवाही की जायेगी। जिसके कारण श्रमिक सिर्फ सांत्वना की आस पर भुगतान की राह देख रहे है।

फोटो फाइल


विभागीय सूत्रों के अनुसार बीते माह इन समस्याओं को लेकर जिले के वन विभाग के मुखिया को इन समस्याओं से अवगत कराया गया था लेकिन अवगत कराने के बावजूद मुखिया द्वारा इसे संज्ञान में न लेते हुए ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।


विभागीय सूत्रों के अनुसार वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा परिक्षेत्र अधिकारियों के साथ अभ्रदता की जाती है। निजी जिंदगी से संबंधित टीका टिप्पणी की जाती है। जिससे प्रताडित परिक्षेत्र अधिकारी न तो शिकायत कर पा रहे है ना ही अपनी व्यथा वरिष्ठ अधिकारियों को बता पा रहे है। क्योंकि अगर वह शिकायत करते है तो उनके विरूद्ध, निलंबन, विभागीय जांच, आरोप -प्रत्यारोप व अन्य सिविल सेवा अधिनियम का उल्लंघन करने संबंधित सूचना पत्र मिलने का डर है। सीआर खराब होने का डर समाया हुआ है। जिससे वह अपने को लाचार और नौकरी छोडने का भी मन बना चुके है।


विभागीय सूत्रों के अनुसार वहीं जिले के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा एक डिप्टी रेंजर को दो परिक्षेत्रों में रंेजर सहित पांच-पांच प्रभार देने की चर्चाएं सुर्खियों में है।

वन विभाग के मुखिया को यह जानकारी भी है कि कहा-क्या हो रहा है और कितने श्रमिकों का भुगतान कब से और क्यों रूका है लेकिन वह अपने विभागीय अधिकारियों का पक्ष रखते हुए खबरें गलत होने का हवाला दे रहे है।

इनका कहना है
भुगतान की आस में बैठे श्रमिको का कहना है कि उन्हें वन विभाग से रोजगार मिलता है वह कई वर्षो से वन विभाग के प्रति समर्पित भाव से काम कर रहे है लेकिन कोरोना काल और बढती मंहगाई के समय यह पहली बार हुआ है कि लंबे समय से हमे भुगतान नही मिला है। हम शिकायत भी नही कर पा रहे है क्योंकि बीते वर्षो में संबंधित अधिकारियों द्वारा समय पर भुगतान कर दिया गया है और आज भी वह अधिकारी हमें सात्ंवना दे रहे है कि आज कल में भुगतान हो जायेगा आप शिकायत न करें।
वन विभाग के पीडित श्रमिक


यह जानकारी संज्ञान में आई है दिखवाते हैं।
श्री अशोक बर्नवाल
प्रमुख सचिव
मध्यप्रदेश वन विभाग

श्रमिकों का भुगतान शेष नही है यह जानकारी गलत है, वहीं एक डिप्टी रेंजर को पांच प्रभार देने के मामले में कहा गया कि कुछ समय के लिए दिया गया है।


श्री अशोक कुमार मिश्रा
मुख्य वनसंरक्षक एवं वन वृत सिवनी , क्षेत्र संचालक पेंच टाईगर रिजर्व सिवनी


हिन्दुस्थान संवाद

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