आत्मनिर्भर भारतः जिले की 43 समितियों को मिला वनोपज का मालिकाना हक, समितियां दे रही मजदूरों को मनरेगा दर से अधिक मजदूरी


4300 से अधिक परिवार, पहली बार मिला वनोपज का मालिकाना हक
बिगडे वनों के सुधार से 43 समिति होगी आत्मनिर्भर होगें, वनो का होगा संवर्धन, लोगों को मिलेगा रोजगार

सिवनी, 22 फरवरी। जिले के दक्षिण सामान्य वनमंडल में बिगडे वनो के सुधार के अंतर्गत 43 समितियों का गठन किया गया है और इससे 4300 से अधिक परिवार आत्मनिर्भर बनेगें वहीं कटाई कार्य में एक समिति में लगभग 21 मजदूर कटाई कार्य करेगें जिससे लगभग 900 ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा और वनोपज से प्राप्त राशि से समिति दूसरा भी रोजगार स्थापित कर सकती है। जिससे ग्राम के अन्य लोग भी रोजगार से लाभान्वित होगें। वहीं समिति द्वारा मजदूरों की मजदूरी दर 200 प्रतिदिन निर्धारित की है जो मनरेगा दर 190 से 10 रू अधिक है।

उत्तर सामान्य वनमंडल सिवनी के उपवनमंडलाधिकारी गोपाल सिंह ने हिन्दुस्थान संवाद को बताया कि वनमंडल के अंतर्गत सूक्ष्म प्रबंधन योजना वर्ष 2020-21 बनाने का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों की वर्तमान की मूलभूत आवश्यकताओं को जानना, आवश्यकता अनुरूप वरीयताक्र्रम निर्धारित कर प्राथमिकता के साथ आवश्यकताओं की पूर्ति करना है। जिससे ग्रामीणों की आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ उन्हें रोजगार के अवसर प्रदाय कर आत्मनिर्भर बनाया जा सके। इस योजना से उत्तर उत्तर सामान्य वनमंडल के अंतर्गत यह कार्य 43 समितियां पूर्ण कर चुकी है। जिससे 4300 से अधिक परिवार लाभान्वित होगे और आत्मनिर्भर बनेगें। 43 समितियांें में से वर्तमान में 02 समिति बालपुर रैयत और रणधीर नगर में यह कार्य प्रांरभ हो गया है तथा अन्य समितियों में भी यह कार्य जल्द प्रांरभ हो जायेगा।

ग्रामीणों को रोजगार के अवसर प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाना
वन परिक्षेत्र कहानी में संयुक्त वन प्रबंधन के संकल्प के प्रावधानों के अनुसार वन क्षेत्र का संवहनीय प्रबंधन सुनिश्चित करने व वन क्षेत्र के सुधार में स्थानीय समुदाय, विशेष रुप से गरीबों की आजीविका से जुडे हुये हितों को बढावा देने के लिये वानिकी क्षेत्रक के अलावा शासन की अन्य योजनाओं में उपलब्ध निधियों का अन्र्तविभागीय समन्वय से स्थानीय समुदाय की सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिये सूक्ष्म प्रबंध योजना का निर्माण किया गया है। जिससे ग्रामीणों की आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ उन्हें रोजगार के अवसर प्रदाय कर आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

वनोपत शत् प्रतिशत समिति को दिया जायेगा

वन परिक्षेत्र कहानी के ग्राम वन समिति बालपुर रैयत में इसका कार्य प्रांरभ हो चुका है। समिति को आवंटित रकबा 40 हेक्टेयर क्षेत्रफल को 04 भागों में बांटा गया है। जिसमें प्रत्येक भाग का रकबा 10 हेक्टेयर है। प्रतिवर्ष प्रत्येक भाग में विरलन कार्य किया जावेगा। विरलन में प्राप्त वनोपज शत् प्रतिशत समिति को दिया जावेगा। प्रथम वर्ष उपचारित किये जाने वाले क्षेत्र को सीमांकित किया गया। जिसमें विरलन हेतु कक्ष में 1 हेक्टेयर का सर्वेक्षण प्लाट डाला गया। बांस क्षेत्र में 1 हेक्टेयर का प्लाट डालकर करला, महिला, पकिया बांसों की गिनती की गई जिसमें 2302 वृक्ष प्राप्त हुये। जिसमें विरलन उपरांत 969 वृक्ष शेष होगें। बांस भिर्रो में 382 भिर्रे प्राप्त हुये जिसमें औसतन प्रति भिर्रे से 4 पकिया बांस निकाले जावेंगे। समिति के सदस्यों ने सुझाव दिया कि सगरैया सूत्र से काटे जाने वाले 1315 वृक्ष प्रति हेक्टेयर न काटकर मात्र 810 वृक्ष ही वर्तमान में काटे जायें जिससे पांचवे वर्ष पुनः इन शेष बचे वृक्षों को काटा जा सके और ग्रामीणो के मांग की पूर्ति हो सकें और वृक्षों को बीच में कटाई न किया जायें पूरी बल्ली जिनता बन सकती है काटा जायें। प्रथम भाग में 5 हेक्ट. क्षेत्र में सागौन वृक्षारोपण एवं 5 हेक्ट. क्षेत्र में सफल बांस वृक्षारोपण है। इस प्रकार प्रतिवर्ष विरलन कार्य किया जावेगा एवं प्राप्त वनोपत शत् प्रतिशत समिति को दिया जावेगा।

मनरेगा से अधिक मजदूरी मिल रही ग्रामीणों को

कहानी परिक्षेत्र में 1 हेक्टेयर सागौन वृक्षारोपण क्षेत्र में 810 वृक्ष मार्क किये गये जिन्हें कटाई कर समस्त वनोपज समिति को सौपा गया। समिति ने मजदूरो की मजदूरी दर 200 प्रतिदिन निर्धारित की है जो मनरेगा दर 190 से 10 रू अधिक है। बल्लियो के विक्रय से प्राप्त समस्त राशि को 24 घटे के अंदर समिति के खाते जमा होगा। 1 हेक्टेयर क्षेत्र में 382 भिर्रे 4 बांस प्रति भिर्रा विदोहन किया जा सकता है जिसमें 1528 पकिया बांस प्रति हेक्टेयर प्राप्त होगें। इसी प्रकार 05 हेक्टेयर में 7640 बांस और 4000 बल्ली प्रतिवर्ष प्राप्त होगें। जिससे वन समिति की मांग की पूर्ति हो सकेगी साथ ही वृक्षारोपण के आसपास ग्रामों में भी पूर्ति की जा सकेगी।

04 वर्षो की होगी योजना
इस योजना की अवधि 04 वर्ष की है। जो 2020 से 2024 तक होगी। बिगडे वन क्षेत्रों के लिये 43 ग्राम वन समितियों का किया गया। बिगडे वनों से 5 कि.मी. की सीमा में आने वाले ग्रामो में यह समिति का गठन किया जाता है। जिससे मानव सभ्यता के विकास के साथ-साथ कम होते गये वन क्षेत्रों, बढते जैविक दबाब एवं जनसंख्या वृध्दि को दृष्टिगत रखते हुये वनों की सुरक्षा एवं संवर्धन व वनों की सुरक्षा एवं संवर्धन में वनों के समीपस्थ ग्राम वासियों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सकें और समिति एवं वन विभाग के संयुक्त प्रयासो द्वारा बिगडे वनों का सुधार कर प्राप्त होने वाली वनोपज को शत् प्रतिशत समिति को प्रदाय किया जा सकेे।

वन क्षेत्र में इकोलाॅजिकल स्थिति को बढ़ावा देकर सफल वृक्षारोपण से लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना

इस योजना से वन क्षेत्र के सुधार में स्थानीय समुदाय की भूमिका सुनिश्चित कर विशेष रुप से गरीबो की आजीविका को बढावा देना एवं वनों के संवहनीय प्रबंधन को सुनिश्चित करना वानिकी क्षेत्र के अलावा शासन की अन्य उपलब्ध निधियों का अन्र्तविभागीय समन्वय से एकीकृत प्रस्ताव तैयार कर वन क्षेत्र एवं ग्राम का विकास करना , वन क्षेत्र में इकोलाॅजिकल स्थिति को बढ़ावा देना है व सफल वृक्षारोपणों में विरलन आदि कार्य कर रोजगार के साथ-साथ समिति को समिति को आत्म निर्भर बनाना। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अल्पीकरण एवं पारिस्थितिकीय सेवाओं के सतत् संचालन के लक्ष्य की प्राप्ती करना। वन क्षेत्रों के उपचारण के अपेक्षित नतीजे प्राप्त कर बिगडे वन क्षेत्र को अच्छे वन क्षेत्रों में स्थापित करना। वन संरक्षण का महत्व समझाते हुये ग्रामीणों की संरक्षण एंव संवर्धन में संयुक्त भागीदारी सुनिश्चित करना है।

समिति द्वारा किये गये सुरक्षा कार्य के उपरांत आये सुधार, जंगल हुआ सुरक्षित
बताया गया कि ग्रामीण को वनोपज का मालिकाना हक मिलने से वह वनों को बचाने में लगे है वह गाड़ियों से लकडी नहीं लाते। बाड़ियों को कुडों से रुंधते है। इमारती लकड़ी कम कटती है। तथा समिति के ग्रामवासियों और आसपास के ग्रामवासियों को बांस -बल्ली मिलने से वह वनों को नही काट रहे है। जिससे जंगल सुरक्षित हो गया है। ग्रामवासियों को मालूम है कि यह वनोपज उनकी है शासन को नही जा रही है जिससे वह वनों को बचाने में लगे हुए है।

वन परिक्षेत्र अधिकारी कहानी, श्रीमति शैलजा ठाकुर ने बताया कि समिति सदस्यो को पहली बार विरलन से प्राप्त वनोपज का मालिकाना हक मिला है जिससे उनमे अत्यधिक उत्साह है । प्राप्त बल्लियो से एक तरफ समिति सदस्यो की मांग की पूर्ति हो रही है, दूसरी तरफ समिति को अतिरिक्त आय भी होगी। इस कार्य से समितियां आत्म निर्भर होगी एवं आत्म निर्भर भारत के लक्ष्यो में समाहित किया जावेगा।

हिन्दुस्थान संवाद

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