हिंदू हितों की रक्षा करना सरकारों का है दायित्व – स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

सिवनी,17 अप्रैल। मंदिरों और घरों में लगी भगवत ध्वज देवताओ के अवतरण का माध्यम है, आज की शिक्षा पद्धति व्यावसायिक हो गयी है, हिन्दू हितों की रक्षा करना सरकारों का दायित्व है,देश का सर्वाेत्तम स्वयं के उपभोग के लिए क्यो नही है।
उक्ताशय के ओजस्वी वक्तव्य दंडी स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने शनिवार को दुर्गा चौक में माता राजराजेश्वरी धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा आयोजित धर्मसभा में उपस्थित विशाल जनसमुदाय को दिए।
द्विपीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के उत्तराधिकारी शिष्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज (ज्योतिर्मठ) ने धर्मपोदेश देते हुए कहा कि ध्वज भगवा ही नही लाल , पीला, नीला और हरे रंग का भी होता सकता है, यह भगवत ध्वज हिन्दू आत्मसम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है इसे मंदिरों और घरों में अनिवार्य रूप से फहराना चाहिए क्योंकि यह संकेत होता है आकाश में विचरण करने वाले देवी देवताओं के अवतरण का माध्यम बनता है और वहाँ प्रभु की कृपा बरसती है।
स्वामी श्री ने कहा कि जल्द ही यहाँ फहराई गयी धर्म ध्वज का प्रोटोकॉल निर्धारित किया जावेगा साथ ही सनातनी परम्परा में निर्वहन के किसी भी हिन्दू को कोई समस्या होगी तो 24 घण्टे के अंदर उसका शास्त्रीय निराकरण परम् धर्म संसद के माध्यम से किया जावेगा।
स्वामी श्री ने हजारो वर्ष पुरानी गुरुकुल शिक्षा प्रणाली का बखान करते हुए बताया कि राजा और रंक दोनों ही एक साथ शिक्षा ग्रहण करते थे एक सा ही भोजन पाते थे एक सी ही सेवा करते थे किंतु आज की शिक्षा प्रणाली पूर्णतरू व्यावसायिक हो गयी है, जो बढिय़ा पढऩे वाले विद्यार्थीयो को विदेश कंपनियां अपने पास बुला लेती है जो सनातनी मानबिंदुओं के विपरीत है।
देश की सरकारों को आड़े हाथ लेते हुए स्वामी श्री ने कहा कि सरकारे कह दे कि हम हिन्दू हितों की रक्षा नही कर सकते तो हम अपनी सरकार बना लेंगे, सरकारों का दायित्व है कि वे हिन्दू हितों की रक्षा करे।
मंच पर ब्रह्मचारी निर्विकल्प स्वरूप जी महाराज, अचलानंद जी, राघवानंद जी सहित अनेक संतगण उपस्थित थे।

हिन्दुस्थान संवाद

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