भोपाल, 19 जुलाई। विशेष न्यायालय सागर ने ऐतिहासिक प्रकरण में लम्बी सुनवाई के बाद सोमवार 19 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय वन्यप्राणी तस्कर गिरोह के 13 आरोपितों को कठोर सात-सात वर्ष का कारावास एवं अधिकतम 5,00,000 का अर्थदण्ड की सजा से दंडित करने निर्णय सुनाया है।

प्रधान मुख्य वनसंरक्षक वन्यप्राणी ने सोमवार की देर शाम को जानकारी दी कि वर्ष 2017 में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) की सागर ईकाई द्वारा अंतर्राष्ट्रीय वन्यप्राणी तस्करी में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 9, 39, 44 48ए, 49बी, 52 एवं 57 के अन्तर्गत दर्ज वन अपराध प्रकरण 28060/02 दिनांक 05.05. 2017 कोर्ट केस 1648 / 17 में एसटीएसएफ द्वारा 04 राज्यों से 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

बताया गया कि इन आरोपियो द्वारा दुर्लभ विलुप्त प्रायः वन्यप्राणी पेंगोलिन एवं लाल तिलकधारी कछुआ (रेडक्राउन रूफ टर्टल) एवं उनके अवयवों की अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर चीन, थाईलैण्ड, हांगकांग, बांग्लादेश, श्रीलंका मेडागास्कर आदि देशों में भारी मात्रा में अवैध व्यापार विगत 10 वर्षों से किया जा रहा था। गिरोह के सदस्यों द्वारा मध्यप्रदेश की चंबल नदी से दुर्लभ विलुप्तप्रायः वन्यप्राणी लाल तिलकधारी कछुआ (रडक्राउन रूफ टर्टल) पकडकर अवैध तरीके से परिवहन कर विदेशों में बेचे जा रहे थे। एसटीएसएफ द्वारा अपनी जांच में यह पाया गया कि इन आरोपियो द्वारा इस अवैध व्यापार में लगभग 04 करोड़ की राशि का लेन-देन हुआ है तथा लगभग 91 हजार प्रतिबंधित प्रजाति के वन्यप्राणी कछुओ का अवैध व्यापार हुआ है। वन्यप्राणी कछुओ के इस स्तर पर हुये अवैध व्यापार से देश की इकोलॉजिकल सिक्योरिटी को भारी क्षति हुई।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि एसटीएसएफ द्वारा अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुये गिरोह के मुख्य सरगना को चेन्नई से जनवरी वर्ष 2018 में गिरफ्तार किया गया। उक्त सरगना पूर्व में स्वर्णभूमि एयरपोर्ट बैंकॉक (थाईलेण्ड) में कछुओ की तस्करी के अपराध में वर्ष 2012 में गिरफ्तार हो चुका था। इंटरपोल के द्वारा इसके विरुद्ध रेर्ड कार्नर नोटिस जारी किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों द्वारा माननीय सर्वाेच्च न्यायालय नई दिल्ली में कई जमानत याचिकाए लगायी गई परन्तु माननीय सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा प्रकरण की गंभीरता को देखते हुये सभी जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुये प्रकरण की नियत अनुरूप निपटारे हेतु ट्रायल न्यायालय को निर्देशित किया। प्रकरण की सुनवाई माननीय सर्वाेच्च न्यायालय की सतत् निगरानी में विगत् 02 वर्षों से जारी थी। वन्यप्राणियों के अवैध व्यापार का देश में यह पहला मामला है जिसमें सर्वाेच्च न्यायालय के सतत् निगरानी में प्रकरण की सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान माननीय विशेष न्यायालय में लोक अभियोजन अधिकारियों द्वारा शासन का मजबूत पक्ष रखते हुए पैरवी की गई जिसमें जांच एजेंसी द्वारा पूर्ण सहयोग किया गया। प्रकरण में वन्यप्राणी पेंगोलिन शल्क एवं लाल तिलकधारी कछुओं की जप्ती की गई थी। वन्यप्राणियों की तस्करी में उपयोग किया गया वाहन मर्सडीज बेन्ज (अनुमानित कीमत लगभग 50 लाख रूपये) महंगे एप्पल कम्पनी के मोबाईल भी जप्त किये गये प्रकरण में वन्यप्राणी एवं उनके अवयवो की फोरेंसिक रिपोर्ट, मोबाईल की फोरेंसिक रिपोर्ट, बैंक खातो का विवरण एवं उनका गोशवारा तैयार किया गया, जोकि आरोपियों को सजा दिलाने में मददगार साबित हुये।

बताया गया कि सोमवार को विशेष न्यायालय सागर द्वारा सभी 13 आरोपियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत विभिन्न धाराओं में दोषी मानते हुये 07-07 वर्ष का कठोर कारावास एवं अधिकतम .5 लाख रूपये का अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है। इस प्रकरण में विभाग का पक्ष रखने वाले समस्त वनाधिकारी एवं अभियोजन अधिकारी को शासन द्वारा पुरुस्कृत किया जावेगा।

हिन्दुस्थान संवाद