पीयूष दुबे

अस्पताल को परिवार जनों का टूरिस्ट स्पॉट न बनने दें , मरीज को आराम करने दें

कोरोना से घबराएं नहीं, आत्मविश्वास बनाएं रखें, सकारात्मक सोच से कोरोना को हरा सकते हैं। सफाई, दवाई, कड़ाई इन बातों का ध्यान रखें, जिले में अब कोरोना हार रहा है, दृढ़ इच्छाशक्ति और हौसले से जीवन की हर लड़ाई जीती जा सकती है। जंग रोकर नहीं, हंसकर जीती जाती है। कोरोना संक्रमण के इस दौर में हर व्यक्ति को मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। ताकि नकारात्मकता हम पर हावी न हो सके। इसके लिए सबसे जरूरी है स्वयं को सकारात्मक रखें, योग व ध्यान करें, पर्याप्त नींद लें, तंबाकू, नशीले पदार्थों आदि का सेवन न करें। अपनों के संपर्क में रहें।

कोरोना संक्रमण के बीच जिला चिकित्सालय सिवनी की स्थिति काफी संतोषजनक है , अभी वार्डो में बैड और ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था देखने मिल रही है  ,इसलिए घरों में बैठे मरीजो को अस्पताल का रुख करना चाहिए ,अस्पताल जाते समय सकारात्मक रहें , सीधे अंदर जाकर निशुल्क पर्ची कटायें , फिर  बाजू वाले कमरे में बैठे डॉक्टर से परामर्श लें , यदि डॉक्टर भर्ती के लिए कह रहे है तो बिना सोचे भर्ती कराए, वार्ड में जाने से पहले फिर एक भर्ती पर्ची कटायें , ऐसी  स्थिति  में  मरीज को पैदल न चलने दे  उसे व्हीलचेयर अथवा स्ट्रेचर में वार्ड की और ले जाएं।

जिला चिकित्सालय में 6 वार्ड है जिनमे कोविद अथवा सस्पेक्टेड मरीजो की व्यवस्था है , वहां देखिए यदि आक्सीजन लाइन वाला बेड उपलब्ध है तो स्टाफ वो व्यवस्था कराएगा , नही होने तुरन्त में जो मरीज का आक्सीजन लेवल ठीक होगा उसके बाजू में  नीचे बेड में व्यवस्था करें । वैसे आधा घंटे में सब व्यवस्था हो ही जाती है। यदि नही हो पाई तो एकदम इमरजेंसी होने पर उन स्टाफ की सलाह से उन  मरीजो से ऑक्सीजन  लेने को कहें, जिनका आक्सीजन के बिना तुरन्त में काम चल सकता है , अधिक फ्लो में आक्सीजन की जरूरत होने पर स्टाफ से सिलेंडर की व्यवस्था करने का निवेदन करें ,न होने पर बाहर संपर्क करें, मरीज असहाय होने पर अटेंडर के रूप में एक व्यक्ति को रखे जो सिर्फ उनके साथ रहे और अपना भी प्राथमिक रूप  से मेडिसिन लेता रहे , और वो बाहर न घूमे, अस्पताल पहुंचते ही सबसे पहले नर्स एंटीबायोटिक इंजेक्शन लगाकर तत्कालीन उपचार शुरू कर देती है , फिर कोविद की जांच भर्ती होने के कुछ देर बाद वही हो जाती है , पॉजिटिव होने पर कोविद वार्ड में शिफ्ट कर देंगे अथवा वही इलाज चलता रहेगा , जरूरी होने पर कोविद प्रोटोकॉल के अनुसार कुछ ब्लड की जांचे भी अस्पताल में हो रही है, कुछ बाहर भी करवा सकते है। दिन में तीन बार अथवा जरूरत पड़ने पर ब्लडप्रेशर , शुगर और ई सी जी की जांच और इंसुलिन की भी व्यवस्था है , अस्पताल में सामान्य दवाइयां उपलब्ध है जो नही है वो बाहर से उपलब्ध करा सकते है।

अस्पताल में तीनो समय भोजन और चाय की व्यवस्था है , नही चाहने पर बाहर का भी दे सकते है, बाहर केंटीन में उबले पानी के साथ साथ नाश्ता चाय साबुन सोडे  ब्रेड दूध की अच्छी व्यवस्था है , अस्पताल में मरीज का आत्मबल बढ़ाते रहे , और उसके संतुलित आहार , मेडिसिन और पानी   का ध्यान रखें , अस्पताल में हो रही मौतों को अनदेखा करें और उस विषय मे बिल्कुल न सोचें, सेनेटाइजर अवश्य रखें और समय समय पर इसका उपयोग करते रहे , मरीज से  भौतिक सम्पर्क  जितना हो सके न करें, आवश्यक होने पर चिकित्सक इंजेक्शन , दवाई, रिफर या छुट्टी के लिए कहेगा , इसी बीच सी टी स्केंन के लिए सुबह 8 बजे या एक दिन पहले नम्बर  लगा दे , उस दिन सुबह 10 बजे टोकन ले ले और टोकन के हिसाब से सीटी स्कैन करवाने स्ट्रेचर या व्हील चेयर में लाएं, भर्ती मरीजों के लिए सी टी स्केंन का 925/- रुपये लगभग चार्ज है , और अस्पताल में भर्ती मरीज को पहले सी टी स्केंन  में प्राथमिकता मिलती है, सी टी स्केंन की रिपोर्ट दो दिन में मिलती है इसलिए तुरन्त उसकी फ़िल्म लेकर रख लें , रिपोर्ट आने से पहले जरूरत पड़ने में फ़िल्म चिकित्सक को दिखाएं , अस्पताल के स्टाफ  पर इसलिए विश्वास कीजिये क्योकि वो इस क्षेत्र में आपसे अधिक जानते है।

अस्पताल को परिवार जनों का टूरिस्ट स्पॉट न बनने दें , मरीज को आराम करने दें आक्सीजन लगे रहने दें ,  आक्सीजन सिचरेशन  कम होने पर मरीज को इसका पता न चलने दें,, उसे उसके आगामी भविष्य के करणीय कार्य याद दिलाते रहे , सकारात्मक बातों से उसका आत्म विश्वास बढ़ाएं , भाप , काढा और हल्दी वाले दूध का सेवन मरीज और उसका तीमारदार दोनों करते रहें , अस्पताल से हर रोज 20 % लोग डिस्चार्ज हो रहे है इसका सीधा मतलब है कि अधिकतम 24 घण्टे के अंदर आपको नीचे से ऊपर बेड मिल ही जायेगा, फिलहाल पर्याप्त बेड है नीचे लेटने वाली स्थिति नही है।

बुखार न मिटने अथवा अन्य परेशानी होने के बाद भी यदि आप डॉक्टर की सलाह के बावजूद  अस्पताल नही जा रहे तो आप मरीज के साथ साथ पूरे परिवार की गैर इरादतन हत्या करने की कोशिश कर रहे है , अस्पताल में 24 घंटे में आपको पता चल जाएगा क्या करना है और कहां से करना है इसलिए निवेदन है कि अस्पताल वो  समय आने  के पहले पहुँच जाएं जब आपको 24 घंटे का भी वक्त न मिले ” ये सभी मेरे पिछले एक महीने का व्यवहारिक  अनुभव है ,  हो सकता है इसे कोई सैद्धान्तिक रूप से स्वीकार न करें उसकी कोई बात नही , सैद्धांतिक रूप से सब चलता तो ये बीमारी इतना भयावह रूप नही ले पाती ।

मैंने ये सिर्फ इसलिए लिखा क्योंकि अस्पताल से अनभिज्ञ आदमी को भर्ती प्रक्रिया पता चले और समाज मे अस्पताल को लेकर जो पैनिक बना है वो कम हो , उच्चतम क्रय क्षमता के अभिजात वर्गीय लोग निजी अस्पतालों  का रुख कर सकते है , मैंने उनके लिए लिखा जो मेरी तरह मध्यम वर्गीय है।

लेखक राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य ,भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा व अध्यक्ष पंचज विकास परिषद है।