अन्य प्रांतों से भी फल बुलवाकर कर रहे पूर्ति
सिवनी 30 अप्रैल । लगभग 1 माह से जिले में लॉकडाउन लगा हुआ है,और वैसे समय में सिवनी थोक फल व्यापारी संघ के सचिव सूफी मोहम्मद हैदर अली शाह फ्रूट सप्लायर्स द्वारा जिले में सभी फलों की पूर्ति की जा रही है।
ताकत के लिये जरूरी है फल

इसी तारतम्य में सूफी मोहम्मद हैदर अली शाह ने बताया कि इन दिनों कोरोना वायरस के चलते फलों की मांग बढ़ी है। और इसकी पूर्ति अन्य प्रांतो से की जा रही है। अक्सर देखा जाता है कि मरीजों को दवाई के साथ-साथ ताकत के लिए विभिन्न फल एवं जूस के लिए फल की आवश्यकता होती है। जिसकी पूर्ति हमारे द्वारा की जा रही है।
इन गांव से होती है फल की पूर्ति

गर्मी को देखते हुए इन दिनों तरबूज की मांग बढ़ी है। वर्तमान में छिंदवाड़ा जिले के चांद के निकट परसगांव,उबेगांव,सामरगोह से कैप्सूल, तरबूज जो कि लगभग 2 से 5 किलो के होते है,उनकी पूर्ति की जा रही है। इसी तरह डिंगरा (चिमरी) सुपर गोल्ड जो कि अमरावती के निकट परतवाड़ा,कचहरिया,परनीमा, बड़ेगांव,सिंगोड़ी तथा छिंदवाड़ा जिले के जमुनिया से पूर्ति की जा रही है। आगेस्टा तरबूज गोल जो कि 6 से 10 किलो तक के होते है, जिसे बेबीसुंदर तरबूज भी कहा जाता है। बाजार में उपलब्ध करवाये जा रहे है।
आम,अनार,अंगूर की पूर्ति इन प्रांतो से

मौसम को देखते हुए अभी स्थानीय आम ना आने के कारण बादाम, आम हैदराबाद के बारंगल,रैनीकुण्डा,कोडूर,आंध्रप्रदेश से सप्लाई की जा रही है। इसी तरह अंगूर महाराष्ट्र के ताज गांव उस्मानाबाद,नाशिक,पीपलगांव से तथा अनार जालना से बुलाया जा रहा है। लॉकडाउन के चलते नगरीय एवं गांव-गांव में फलों की मांग बढ़ी है।
नारियल की बढ़ी मांग

वर्तमान में नारियल पानी की मांग के चलते बाजार में नारियल की मांग भी बढ़ी है। देखा जा रहा है कि 70 रूपए से 90 रूपए तक प्रति नग फल बाजार में बेचे जा रहे है। इसकी पूर्ति बैंगलोर,कर्नाटक,आंध्रप्रदेश से की जा रही है। इसके अतिरिक्त भी अनेक फल बाजार में उपलब्ध है। जबकि पपीता स्थानीय स्तर पर ही पर्याप्त आ रहा है। और कुछ पपीता नागपुर से बुलवाकर ग्राहकों को उपलब्ध करवाया जा रहा है।
फ्रूटमर्चेन्ट इन प्रांतों में करते है सप्लाई
शाह ने बताया कि उनके द्वारा छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश, लखनऊ, पटना, बिलासपुर, रायपुर, काठमांडू सहित अनेक स्थानों पर माल की सप्लाई की जा रही है। और लोगों को इस संकट की घड़ी में सभी दुकानदारों से किफायत पर फल उपलब्ध कराने की अपील की गई है। यह समय एक ऐसा समय है जिसमें हम लोगों को ज्यादा से ज्यादा सहयोग प्रदान कर सकें। और उनके दुख में शामिल हो सकें। यही सभी से अपेक्षा है। और यही सभी सूफी संत एवं सभी धर्म का सार है।
हिन्दुस्थान संवाद