सिवनी, 07 मई। जिले में कोरोना संक्रमण के बीच बच्चों की किलकारियां भी जिला चिकित्सालय में गूंजी हैं। पॉजिटिव पायी गयी 13 गर्भवती महिलाओ ने बच्चों को जन्म देने के साथ ही कोरोना की जंग को भी जीता हैं। आज माँ और बच्चें दोनों स्वस्थ हैं।


वैश्विक कोरोना वायरस संक्रमण की द्वितीय लहर ने तेजी से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ी है साथ ही शासकीय निजी चिकित्सालयों में मरीजों की संख्या बढोत्तरी हुई है। कोरोना के विरुद्ध इस युद्ध मे चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिसकर्मी, सफाई कर्मियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता- सहायिका के साथ अन्य शासकीय अमले द्वारा पूरी तन्मयता से कार्य कर ढाल की भूमिका निभाई जा रही है।


कोरोनाकाल में डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा मानव सेवा का किए जा रहे कार्य को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। कोरोना की रोकथाम व संक्रमितों के उपचार में वह दिन-रात एक किए हुए हैं। परिवार से दूर रहना, दमघोंटू पीपीई में ड्यूटी करना, घंटों पसीने में नहाए रहना, मरीज का इलाज करना, खुद को संक्रमण से बचाना और कोरोना के खतरे से जीतने के इरादे से लड़ना, इमरजेंसी का चैलेंज और मरीजों की छोटी सी छोटी समस्याओं का ख्याल रखनें की जिम्मेदारी इन्होंने बखूबी निभाई है।


इस कोरोना संक्रमण के बीच बच्चों की किलकारियां भी जिला चिकित्सालय में गूंजी हैं। पॉजिटिव पायी गयी 13 गर्भवती महिलाओ ने बच्चों को जन्म देने के साथ ही कोरोना की जंग को भी जीता हैं। आज माँ और बच्चें दोनों स्वस्थ हैं। जो चिकित्सालय के डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियो की सजगता, साहस एवं मानव सेवा की भावना का ही परिणाम है। जिसके लिए इन महिलाओं के परिवारजन इन डाक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों का आभार व्यक्त कर रहे हैं।


हिन्दुस्थान संवाद