सिवनी, 16 दिसंबर। जिला न्यायालय के भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष न्यायालय ने गुरूवार को रिश्वत लेने के आरोपित कलेक्ट्रेट के एक लिपिक को चार वर्ष की सजा से दंडित करने के आदेश जारी किये है।
मीडिया सेल प्रभारी एवं अभियोजन अधिकारी मनोज कुमार सैयाम ने गुरूवार की शाम को जानकारी दी कि सिवनी निवासी एम.के.खान द्वारा भूमि विक्रय हेतु कलेक्टर कार्यालय में आवेदन दिया गया था जिस पर अनुमति आदेश पत्र में टंकण त्रुटि होने के कारण जमीन विक्रय नही हो रही थी।

जिला सिवनी की भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष न्यायालय द्वारा , भ्रष्टाचार के मामले में कलेक्ट्रेट के लिपिक को सजा सुनाई है ।
कलेक्ट्रेट सिवनी में पदस्थ गुलाब चंद जांगड़े सहायक ग्रेड -2 (रीडर) के द्वारा संशोधन आदेश निकालने के एवज में दो हजार रूपये की रिश्वत मांग की गई थी। जिसकी शिकायत प्रार्थी ने लोकायुक्त जबलपुर को की। जबलपुर लोकायुक्त द्वारा द्वारा दिये गए वॉइस रिकॉर्डर मे प्रार्थी द्वारा रीडर से रिश्वत संबंधी बातचीत रिकार्ड की गई। रिकॉर्डर में वार्ता में रिश्वत की मांग संबंधी तथ्यों की पुष्टि होने पर लोकायुक्त पुलिस ने धारा 7 पी.सी. एक्ट 1988 का प्रकरण पंजीबद्ध किया और 27 जनवरी 16 को ट्रेपदल द्वारा योजनाबद्ध तरीके से रूपये प्रार्थी को दिये गये और प्रार्थी ने लिपिक को कलेक्ट्रेट सिवनी के परिसर में बने जैन कैंटीन में 2 हजार रूपयें की रिश्वत दी और लोकायुक्त टीम ने लिपिक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था।
आगे बताया गया कि लोकायुक्त पुलिस द्वारा धारा 7,13(1) डी,13(2) पी.सी.ए. का प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया और मामला न्यायायल में पेश किया था। जिसकी सुनवाई गुरूवार को राजर्षि श्रीवास्तव, विशेष सत्र न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ) की न्यायालय मे की गई। जिसमें अभियोजन के तर्को के आधार पर न्यायालय ने आरोपित गुलाबचंद जागडे को दोषी पाते हुए धारा 07 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1000 रूपये का अर्थदंड, व्यतिक्रम में 6 माह का सश्रम कारावास और धारा 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में 4 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1000 रूपये का अर्थदंड, व्यतिक्रम में 6 माह का सश्रम कारावास से दंडित किया है।
हिन्दुस्थान संवाद

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