कानपुर, 18 अप्रैल । कोरोना संक्रमण के चलते जहां एक दिवसीय लॉक डाउन की व्यवस्था लागू की है। जिसके चलते सभी सिद्धपीठ मंदिर व धार्मिक स्थलों पर भी दर्शन के लिए रोक लगा दी गई है। भक्तों ने चैत्र नवरात्र के छठवें दिन माता कात्यायनी देवी की पूजा घरों में रहकर ही संपन्न की और माता से कोरोना रूपी दैत्य से सम्पूर्ण संसार को निजात दिलाने के लिए प्रार्थना की।

तपेश्वरी मंदिर के पुजारी नरेश ने बताया कि नवरात्र में माता सभी भक्तों के घरों में निवास करते हुए उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। नवरात्र में माता की मूर्ति व कलश स्थापना कर सच्चे मन से मां की आराधना करने से माता खुश होती है और अपने भक्तों के कष्टों को भी हर लेती है।

उन्होंने बताया कि माता ‘कात्यायनी’ अमरकोष में पार्वती के लिए दूसरा नाम है, संस्कृत शब्दकोश में उमा, कात्यायनी, गौरी, काली, हेमावती व ईश्वरी इन्हीं के अन्य नाम हैं।शक्तिवाद में उन्हें शक्ति या दुर्गा, जिसमे भद्रकाली और चंडिका भी शामिल है।

यजुर्वेद के तैत्तिरीय आरण्यक में उनका उल्लेख है। स्कन्द पुराण में उल्लेख है कि वे परमेश्वर के नैसर्गिक क्रोध से उत्पन्न हुई थीं। जिन्होंने देवी पार्वती द्वारा दी गई सिंह पर आरूढ़ होकर महिषासुर का वध किया। वे शक्ति की आदि रूपा है। जिसका उल्लेख पाणिनि पर पतंजलि के महाभाष्य में किया गया है, जो दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में रचित है। उनका वर्णन देवीभागवत पुराण, और मार्कंडेय ऋषि द्वारा रचित मार्कंडेय पुराण के देवी महात्म्य में किया गया है। जिसे चार सौ से पांच सौ ईसा में लिपिबद्ध किया गया था।

बौद्ध और जैन ग्रंथों और कई तांत्रिक ग्रंथों, विशेष रूप से कालिका पुराण (दस वीं शताब्दी) में उनका उल्लेख है, जिसमें उद्यान या उड़ीसा में देवी कात्यायनी और भगवान जगन्नाथ का स्थान बताया गया है। उनका कहना है कि परम्परागत रूप से देवी दुर्गा की तरह वे लाल रंग से जुड़ी हुई हैं। नवरात्रि उत्सव के छठवें दिन उनकी पूजा की जाती है। उस दिन साधक का मन ‘आज्ञा चक्र’ में स्थित होता है। योगसाधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस चक्र में स्थित मन वाला साधक माता कात्यायनी के चरणों में अपना सर्वस्व निवेदित कर देता है। परिपूर्ण आत्मदान करने वाले ऐसे भक्तों को सहज भाव से माता के दर्शन प्राप्त हो जाते हैं।

नवरात्रि का छठवें दिन माँ कात्यायनी की उपासना का दिन होता है। इनके पूजन से अद्भुत शक्ति का संचार होता है व दुश्मनों का संहार करने में ये सक्षम बनाती हैं। इनका ध्यान गोधुली बेला में करना होता है। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माता जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में छठे दिन इसका जाप करना चाहिए। इसके अलावा जिन कन्याओं के विवाह मे विलम्ब हो रहा हो। उन्हे इस दिन माता कात्यायनी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, जिससे उन्हे मनोवान्छित वर की प्राप्ति होती है।

इनपुट- हिन्दुस्थान समाचार