सिवनी ,02 सितम्बर ।  कृषि विज्ञान केंद्र सिवनी के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एन.के. सिंह, वैज्ञानिक डॉ. के.के. देशमुख, इंजी. कुमार सोनी, श्री जी. के. राणा एवं कृषि विस्तार अधिकारी जे.एन. बोकडे के संयुक्त दल द्वारा 31 अगस्त एवं 01 सितम्बर 21 को विकासखंड सिवनी के ग्राम सिमरिया ढेंकी में कृषकों के खेत में लगी धान, मक्का और सोयाबीन फसल का निरीक्षण किया गया। जिसमें धान की फसल में जीवाणु पत्ती झुलसा रोग का प्रकोप देखा गया। झुलसा रोग के प्रकोप के कारण प्रारंभिक अवस्था में पत्तियों के दोनो किनारे सूखने लगते है एवं रोग की तीव्रता होने पर उपर की पत्तियां सूख जाती हैं। जिसके नियंत्रण के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का 150 ग्राम एवं स्ट्रेप्टोसायक्लीन का 35 ग्राम को 150 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड के मान से छिडकाव करें। कुछ क्षेत्रों में धान की फसल में ब्लास्ट रोग का प्रकोप देखा जा रहा है। इस रोग की प्रारंभिक अवस्था में धान की पत्तियों में तिकोनी आँख नुमा आकार बना होता है नियंत्रण के लिए ट्राइसाइक्लाजोल-75 डब्ल्यू. पी. का 150 ग्राम या प्रोपीकोनाजोल-25 ई.सी. का 150 मि.ली. या इप्रोबेनफास-48 ई.सी. का 300 ग्राम दवा 150 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड की दर से छिडकाव करें।

धान की फसल में वर्तमान में पत्ति मोडक कीट का प्रकोप भी देखा जा रहा है। प्रभावित पत्तियां सूख जाती है जो खुरचे हुये प्रतीत होते है अत्यधिक प्रकोप होने पर पूरी फसल की पत्तियों में सफेद धब्बे बनते है पत्ति मोडक कीट के नियंत्रण के लिए क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एस. सी. दवा का 60 मि.ली. या फ्लूबेंडामाइड 20 डब्ल्यू. जी. का 50 ग्राम या क्यूनालफॉस 25 ई.सी. का 640 मि.ली. प्रति एकड की दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें। धान की फसल में शीथ ब्लाइट रोग का प्रकोप भी देखा जा रहा है। इस रोग में जमीन से उपर तने के भाग से उपरी पत्तियों में बडे आकार के धब्बे बने दिखते है। इस रोग के नियंत्रण के लिए प्रोपीकोनाजोल 25 ई. सी. का 400 मि. ली. या हेक्साकोनाजोल 50 प्रतिषत का 300 मि.ली. या बेलिडामाइसिन 3 एल. का 300 मि.ली. दवा को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें। सोयाबीन फसल में निरीक्षण के दौरान एन्थे्रक्नोज तथा रायजेक्टोनिया एरियल ब्लाईट रोग का प्रकोप देखा गया। इस रोग के नियंत्रण हेतु टेबूकोनाजोल 625 मि.ली. या पूर्व मिश्रित फफूंदनाशक पायराक्लोस्ट्रोविन इपाक्सीकोनाजोल का 750 मि.ली. प्रति हेक्टेयर के मान से छिडकाव करने की सिफारिष की गई। वर्तमान में लगी सोयाबीन फसल में पीला मोजेक वायरस रोग का प्रकोप भी देखा गया इस रोग के नियंत्रण हेतु सलाह है कि प्रारंभिक अवस्था में ही रोग ग्रसित पौधों को उखाड कर तुरंत खेत से अलग करना चाहिये तथा सफेद मक्खी व एफिड जैसे रस चूसने वाले रोग वाहक कीटों के नियंत्रण हेतु अपने खेत में विभिन्न स्थानों पर पीला स्टीकी ट्रेप लगायें एवं पूर्व मिश्रित कीटनाषक थायोमैथाक्जाम लेम्बडासायलोहेथ्रीन का 125 मि.ली. या बीटासायफ्लूथ्रीन इमीडाक्लोप्रीड का 350 मि.ली. प्रति हेक्टेयर के मान से छिडकाव करना चाहिएं टमाटर की फसल में जीवाणु पत्ती झुलसा रोग का प्रकोप देखा गया है जिसके नियंत्रण हेतु कॉपर आक्सीक्लोराइड 150 ग्राम एवं स्ट्रेप्टोसायक्लीन 35 ग्राम को 150 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें। 

हिन्दुस्थान संवाद