सिवनी, 21 फरवरी। जिले के चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज द्वारा आगामी 26 फरवरी को जीएसटी कर प्रणाली के विरुद्ध कैट द्वारा आयोजित संपूर्ण भारत बंद के आह्वान में को सफल एवं व्यापक बनाने में अपना पूर्ण सहयोग दिया जाएगा। चेंबर केंद्र एवं राज्य सरकारों से यह मांग भी करता है कि वह पेट्रोल एवं डीजल के मूल्यों को भी जीएसटी कर के दायरे में लाएं । चेंबर द्वारा इस हेतु सभी व्यापारिक संगठनों एवं व्यापारी बंधुओं से अपील की गई है कि वह इस व्यापक बंद में बढ़-चढ़कर अपना सहयोग दें। इस आशय का निर्णय चेंबर कि गत दिवस हुई बैठक में लिया गया।

चेंबर के अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल द्वारा कहा गया कि जीएसटी कर प्रणाली की विसंगतियों के चलते जो व्यापारी कर वंचना करते हैं वो सरकार के कर दायरे से बाहर हैं और  इसका खामियाजा उन व्यापारियों को भुगतना पड़ता है जो जीएसटी के तहत पंजीकृत हैं और ईमानदारी से व्यापार करते हुए कर की पालना कर रहे हैं !

चैम्बर के अध्यक्ष द्वारा कहा गया कि, नियमों का पालन करते हुए इमानदारी से कर करने  भरने वाले लोगों को समय पर रिफंड नहीं मिलता है, वे कर पालना के भारी बोझ के से दबे हैं और उनको अनेक मामलों में इनपुट क्रेडिट भी नहीं मिल पाता है और जिसके चलते उनका उत्पीड़न तो होता ही है बल्कि उनकी पूँजी भी विभाग के पास फंसी रहती हैं ! आये दिन उनसे अनेक प्रकार का डेटा माँगा जाता है और विभिन्न प्रशासनिक बाधाओं का लगातार उन्हें सामना करना पड़ रहा है।

चेंबर के सचिव संजय मालू द्वारा कहा गया कि हाल में ही लागू क़ानून के हिसाब से ५० लाख से अधिक के मासिक  व्यवसाय पर कर दायित्व का १% नक़द भुगतान आवश्यक हैं ,जिसके कारण से अनावश्यक रूप से व्यापारी की कार्यशील पूँजी का हिस्सा विभाग के पास जमा रहेगा। यह निर्णय माल एवं वस्तुकर का  पूर्ण आगत कर मे जो रिबेट मिलना था उसके भी विरुद्ध है।

मालू ने कहा कि व्यापारी वर्ग इस देश के आर्थिक विकास की रीढ़ है ।विश्व के सभी प्रमुख देशों में व्यापारियों से के लिए सरल कर प्रणाली विकसित की गई है ताकि व्यापारी को भी परेशानी ना हो और वह स्वयंमेव सरकार का सहयोग करें। सरकार और व्यापारी के बीच विश्वास का रिश्ता होना जरूरी है केंद्र सरकार से हमारी अपील है कि वह व्यपारियों को स्वैच्छिक कर पालन के लिए प्रोत्साहित करे । 

सिवनी चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के संरक्षक सुदर्शन बाझल द्वारा कहा गया कि से कहा कि यदि जीएसटी कर प्रणाली को सुविधाजनक एवं तर्कसंगत बनाया जाता है तो देश भर के व्यापारी कर आधार को व्यापक बनाने और सरकार को अधिक राजस्व प्राप्त करने के लिए तत्परता से सरकार का सहयोग करेंगे !

बैठक मे अपनी बात रखते हुए चेंबर के कोषाध्यक्ष विनोद अग्रवाल द्वारा कहा गया कि सरकार एवं अधिकारियों को   त्रुटि और कर वंचना के बीच अंतर को समझना जरूरी है ! उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक जिला स्तर पर संबधित अधिकारियों और व्यापारियों के एक कार्य समूह का गठन किया जाए जो जीएसटी के कार्यान्वयन एवं व्यापारियों की समस्याओं को दूर करने में सहायता करे।

चेंबर द्वारा कहा गया कि जीएसटी से संबंधित विभिन्न समस्याओं को लेकर हमारे सभी संगठनों द्वारा निरंतर सरकार से चर्चा की जा रही है किंतु ना तो कोई ठोस आश्वासन मिला ना ही इस कर प्रणाली में सुधार के कोई प्रयास हुए जिसके चलते विवश होकर हमें आगामी 26 फरवरी को बंद का आवाहन करना पड़ रहा है। ऐसे में सभी व्यापारिक बंधुओं का कर्तव्य है कि वह इस बंद में बढ़-चढ़कर अपना सहयोग देवें।

हिन्दुस्थान संवाद

error: Content is protected !!