सिवनी, 08 फरवरी। सिवनी जिले में भगवान भोलेनाथ के मंदिर बाहुल्य है मंदिरों में सबसे प्राचीन मठ मंदिर , बडा शिव मंदिर, शिव मंदिर डूंडा सिवनी सिर्फ आस्था की दृष्टि से बल्कि ऐतिहासिक रुप से भी काफी महत्व रखता है। वहीं भोलेनाथ की नगरी सिवनी में विश्व का सबसे बडा स्फटिक शिवलिंग ग्राम दिघोरी में स्थापित है।


सिवनी नगर में अनेक भव्य ऐतिहासिक सुंदर कलात्मक मंदिर अपनी गौरवगाथा स्वयं कहते प्रतीत होते है किंतु सिवनी मठ मंदिर का इतिहास बडा अनूठा है शिव मंदिर नगर के दक्षिण-पश्चिम में स्थित नगर का अति प्राचीन मंदिर है जो हिन्दु धर्मावलम्बियों की आस्था का केन्द्र है। जिले में प्राचीन मंदिरों का इतिहास बडा स्वर्णिम रहा है।

सिवनी का मठ मंदिर हिन्दू सनातन धर्म व संस्कृति के केन्द्र के रूप में विद्यमान है। इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव-लिंग रुप में विराजमान है। आस्था और श्रध्दा का केन्द्र भगवान भोलेनाथ के मठ मंदिर में स्थापित दिव्य शिवलिंग लगभग 250 वर्ष पूर्व की मानी जाती है। मठ मंदिर से लगा पश्चिम दिशा में मोती तालाब है, जिसे वर्तमान में मठ तालाब कहते है। इस मंदिर का आन्तरिक भाग प्राचीन निर्माण के अनुरूप है, जबकि बाहय भाग कुछ वर्ष पूर्व जीर्णोद्वार हुआ है। मंदिर के समीप 03 विशालकाय वट वृक्ष है। जहां पर नारीशक्ति पूजा अर्चना करती है।

मंदिर में बाबा काल भैरव, राधा कृष्ण , हनुमान लला, श्रीगणेश, नंदी जी की अदभुत प्रतिमाएं है। यह एक सिद्ध मंदिर है जहां पर भक्तगण जो भी मनोकामनाएं करते है भगवान शिव उन्हें पूर्ण करते है। मंदिर में सुबह-शाम प्रतिदिन आरती वंदन होता है। श्रावण मास में और शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की विशेष आराधना की जाती है। नवरात्रि पर्व में भी नौ दिन तक निरंतर शक्ति और शिव की उपासना की जाती है।

हिन्दुस्थान संवाद

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