सिवनी, 23 फरवरी। पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का आज गुरू रत्नेश्वर धाम दिघोरी में आगमन हुआ। उनके साथ उनके मंत्रिमंडल के एक सदस्य रविन्द्र चौबे भी थे, जिन्होंने महाराजश्री का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर आपने रायपुर में बने आश्रम का पट्टा उनके चरणों में भेंट किया। 1 रूपये की राशि में 10 एकड़ जमीन का पट्टा राज्यपाल के हस्ताक्षर से महाराजश्री को जारी हुआ है। यहां महाराजश्री का भव्य आश्रम है।


मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि जब वे अविभाजित मध्यप्रदेश सरकार के राजस्व मंत्री थे तब उन्हें रायपुर में 10 एकड़ की जमीन दी गई थी। इसके लिये वर्तमान में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी बहुत प्रयास किया था। आज सौभाग्य का दिन है कि 18 साल बाद यह अवसर आया है कि भूपेश बघेल मुख्यमंत्री हैं और उन्होंने 10 एकड़ की भूमि का पट्टा मात्र 1 रूपये की राशि में महाराजश्री को प्रदान किया है।


आपने कहा कि 19 साल पहले भी वे दिघोरी आ चुके है जब उनकी राष्ट्रीय नेता श्रीमती सोनिया गांधी दिघोरी आई थी और उस समय गुरू रत्नेश्वर की स्थापना का अवसर था, जिसे स्व. हरवंश सिंह की देखरेख में किया गया था, उस समय भी मुझे यहां आने और रहने का अवसर मिला था।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जनमानस को संबोधित करते हुये कहा कि यह बड़े सौभाग्य का विषय है कि मध्यप्रदेश के ग्राम दिघोरी में महाराजश्री का जन्म हुआ है और गुरू रत्नेश्वर धाम में आज महाराजश्री के अमृत वचन सुनने का अवसर सनातनियों को मिल रहा है।

आपने कहा कि छत्तीसगढ़ की सरकार किसान हितैषी सरकार है, जिसने किसानों की धान 25 सौ रूपये खरीदी है। छत्तीसगढ़ में गो-पालकों को प्रोत्साहित करने के लिये गाय का गोबर दो रूपये किलो में खरीदा जा रहा है और इसी गोबर से खाद बनाई जा रही है, ताकि जनता को शुद्ध गाय के गोबर की खाद का अनाज मिल सके। आपने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार गो-पालकों के लिये इस योजना को बनाया है। सरकार का मानना है कि नरवों में पानी और गौ है तो किसानों का जीवन खुशहाल है। आज किसान जितना पैसा दूध में कमाता है उससे ज्यादा उसे गोबर में आमदनी हो रही है। आमदनी के लिये किसान गाय को अच्छा चारा भी खिला रहा है।


मुख्यमंत्री और उनके सहयोगी ठीक समय पर हेलीकॉप्टर से दिघोरी पहुंचे और पहले उन्होंने महाराजश्री की कुटिया में उनसे आशीर्वाद लिया और फिर मंच पर आकर महाराजश्री को 10 एकड़ भूमि का पट्टा देकर आशीर्वाद लेकर विदा ले ली।


हिन्दुस्थान संवाद

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