भोपाल, 18फरवरी। प्रमुख सचिव, महिला-बाल विकास श्री अशोक शाह ने वल्नरेबल क्षेत्रों में निवासरत भिक्षावृत्ति, अखबार वितरित करने जैसे कार्य में संलग्न बच्चों की वल्नेरेबिलिटी मैपिंग के निर्देश दिए है। श्री शाह गुरुवार को राज्य बाल संरक्षण समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण के क्षेत्र में देख-रेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिये कार्यरत सभी संस्थाओं का किशोर न्याय अधिनियम के अंतर्गत पंजीयन कराना अनिवार्य होगा।

प्रमुख सचिव श्री शाह ने अधिकारियों को बाल संरक्षण से संबद्ध मुद्दों पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम के बारे में जागरूकता के लिये अंतर्विभागीय समन्वय के माध्यम से प्रयास, जोखिमपूर्ण अवस्था में पाये जाने वाले बच्चों के संरक्षण एवं देख-रेख के आवश्यक उपाय, बाल अपराधों के आंकड़ों के संबंध में अद्यतन जानकारी साझा करने के लिये गृह विभाग से समन्वय स्थापित करने, शासकीय चिकित्सालयों तथा स्वास्थ्य केन्द्रों में पालना स्थापित करने, बाल देख-रेख संस्थाओं में निवासरत बच्चों की व्यक्तिगत देख-रेख योजना तैयार कर बच्चों के पुनर्वास के लिये विशेष प्रयास किये जाने के भी निर्देश दिये। श्री शाह ने उच्च न्यायालय की किशोर न्याय समिति द्वारा दिये गये निर्देशों के परिपालन के लिये विभिन्न संबद्ध विभागों द्वारा अपेक्षित कार्यवाही पर चर्चा कर आवश्यक कदम उठाने को कहा है। इस अवसर पर संचालक महिला-बाल विकास श्रीमती स्वाती मीणा नायक तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

हिन्दुस्थान संवाद

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