एनआरसी में कुपोषित बच्चों की हो रही बेहतर देखभाल

सिवनी 26 फरवरी। प्रदेश शासन मध्यप्रदेश के चहुमुखी विकास के लिए विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीनीस्तर पर क्रियान्वयन कर प्रत्येक वर्ग को लाभांवित करते हुए उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जा रहा हैं। वही दूसरी ओर बच्चों एवं महिलाओं के स्वस्थ को लेकर भी शासन सवेंदनशील हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से इनके हित में अनेकों योजनाओं का क्रियान्वयन आज प्रदेश शासन कर रहा हैं। मध्यप्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाना सरकार का प्रमुख लक्ष्य हैं। जिसमे विभाग अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केंद्र भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। बच्चों के प्राथमिक स्वास्थ्य परिक्षण, धात्री महिलाओं एवं बच्चों को पोषण आहर का वितरण सहित अन्य जनजागरूकता संबंधि गतिविधियां आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से संचालित की जाती हैं।

       आंगनबाड़ी केन्द्रों की सक्रियता से छपारा विकासखण्ड के ग्राम जोगीवाड़ा निवासी श्रीमती उमा के एक वर्ष 9 माह का पुत्र शिवांश यादव के कुपोषित होने का प्रारंभिकस्तर में ही चिन्हांकन हो सका है। आंगनबाड़ी केन्द्र में शिवांश के वजन तथा अन्य मापदण्ड के आधार कुपोषित होने के संदेह पर उसका स्वास्थ्य केन्द्र में परीक्षण कराया गया। जिसमें शिवांश कुपोषित पाया गया। शिवांश को कुपोषित से सुपोषित करने हेतु उसे जिला चिकित्सालय स्थित एनआरसी में भर्ती कराया गया है। 17 फरवरी को शिवांश को एनआरसी में भर्ती करते समय 7 किलो 600 ग्राम था, एनआरसी में विशेषज्ञों की देख-रेख में विटामिन, प्रोटिन युक्त पौष्टिक स्वादिष्ट भोजन अन्य चिकित्सकीय उपचार से शिवांश के स्वास्थ्य में लगातार परिवर्तन हो रहा है। जिससे 25 फरवरी को शिवांश का वजन 7 किलो 975 ग्राम हो गया है। जिससे शिवांश के माता-पिता अत्यंत प्रसन्न हैं। जिला चिकित्सालय के एनआरसी प्रभारी डॉ नरेन्द्र नाथ नामदेव ने बताया कि एनआरसी में भर्ती होने वाले बच्चों के माता-पिता को भी बच्चों के विकास के लिए पोषक आहार के महत्व के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है। जिससे निश्चित रूप से बाल शिशु मृत्यु दर में कमी एवं बच्चों के सर्वांगीण विकास में एनआरसी एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों की महत्वपूर्ण भूमिका सिद्ध हो रही है।

हिन्दुस्थान संवाद

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